फजर की क़ज़ा नमाज़ की नियत - Fajar ki Qaza Namaz ki Niyat

NamazInHindi
0
फजर की क़ज़ा नमाज़ की नियत (Fajar ki Qaza Namaz ki Niyat) यानि चूके हुए फर्ज़ की अदायगी। नमाज़ इस्लाम धर्म के 5 स्तंभों में नमाज़ दूसरा स्तंभ है। जो हर मुसलमान पर फर्ज़ है। 

फजर की नमाज़ का तरीका है कि यह नमाज़ रोजाना दिन की शुरुआत में पढ़ी जाने वाली सबसे पहली और महत्वपूर्ण नमाज़ों (Salah) में से एक है। 

लेकिन कई बार अनजाने में या किसी मजबूरी के कारण हम फज्र की नमाज़ (Fajr ki Namaz) समय पर अदा नहीं कर पाते। ऐसे में फजर की क़ज़ा नमाज़ पढ़कर हम अपनी चूक को पूरा कर सकते हैं।

Fajar ki Qaza Namaz ki Niyat ka Tarika
Fajar ki Qaza Namaz ki Niyat

क़ज़ा नमाज़, चूके हुए फर्ज़ नमाज़ की अदायगी का एक तरीका है। यह न केवल हमारे कर्ज़ को अदा करती है बल्कि हमें खुदा की रहमत और माफी का ज़रिया भी बनती है।

फजर की क़ज़ा नमाज़ की नियत (Fajar ki Qaza Namaz ki Niyat)

नियत, नमाज़ का इरादा करना है। यह ज़रूरी है कि हर नमाज़ से पहले हम सही नियत बना लें। फजर की क़ज़ा नमाज़ (Fajar ki Qaza Namaz ki Niyat) की नियत इस प्रकार है। 

5 वक़्त की नमाज़ की नियत का तरीका एक दूसरी नमाज़ से अलग होता है। इन नमाज़ों में फ़र्ज़, सुन्नत, नफिल, और वित्र की नमाज़ की नियत शामिल होती है। 

फजर क़ज़ा नामाज की नियत हिंदी में (Fajar Qaza Namaz ki Niyat in Hindi)

नियत करता/करती हूँ मैं 2 रकअत क़ज़ा फजर फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ने की, वास्ते अल्लाह ताला के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर। 

फजर क़ज़ा नमाज़ की नियत अरबी में (Fajar Qaza Namaz ki Niyat in Arabic)

نويت أن أصلي صلاة قضاء الفجر ركعتين أما الله عز وجل.

फजर क़ज़ा नमाज़ की नियत उर्दू में (Fajar Qaza Namaz ki Niyat in Urdu)

میں نیت کرتا ہوں کہ 2 رکعت قضا فجر "فرض نماز" پڑھنے کا ارادہ رکھتا ہوں، اللہ کے لیے، کعبہ شریف کی طرف منہ کر کے اللہ اکبر

क़ज़ा नमाज़ की नियत का तरीका (Qaza Namaz ki Niyat ka Tarika)

हर नमाज़ की नियत को दिल में करना ही काफी होता है। लेकिन अगर आप ज़ोर आवाज़ से भी नियत कहते हैं तो यह भी बेहतर है।

1. फजर की सुन्नत नमाज़ की नियत: मैं नियत करता/करती हूँ मैं 2 रकअत क़ज़ा फजर सुन्नत नमाज़ पढ़ने की, वास्ते अल्लाह ताला के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर।

2. फजर की फ़र्ज़ नमाज़ की नियत: मैं नियत करता/करती हूँ मैं 2 रकअत क़ज़ा फजर फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ने की, वास्ते अल्लाह ताला के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर।

फजर की क़ज़ा नमाज़ की रकात (Fajar ki Qaza Namaz ki Rakat)

नमाज फर्ज़ सुन्नत
फजर क़ज़ा नमाज़ 2 Rakat 2 Rakat

फजर की क़ज़ा नमाज़ में चार रकातें होती हैं। यह दो दो रकातों करके दो हिस्सों में पढ़ी जाती है। फज्र नमाज़ की रकात जिसमें सबसे पहले 2 रकअत सुन्नत और आखिर में 2 फ़र्ज़ की रकातें शामिल होती हैं।

फजर क़ज़ा की पहली नमाज़:
  • सुन्नत की 2 रकातें
फजर क़ज़ा की दूसरी नमाज़:
  • फ़र्ज़ की 2 रकातें
कुल रकातें: (2 + 2) = 4

नोट: कुछ उलेमा ए दीन (मौलान तारिक मसूद) का मानना ​​है कि फजर की क़ज़ा नमाज़ की रकतों में केवल दो रकातें (वाजिब) यानि फ़र्ज़ की पढ़ी जानी चाहिए।

यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप किस मत के अनुसार नमाज़ पढ़ना चाहते हैं। यदि आप को नहीं पता है तो किसी विश्वसनीय बड़े मौलवी से सलाह लेना सबसे अच्छा है।

फजर की क़ज़ा नमाज़ का तरीका (Fajar ki Qaza Namaz ka Tarika)

इस भाग में हम आपको फजर की क़ज़ा नमाज़ पढ़ने के तरीके के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे। हम आपको नियत और रकातों के बारे में पहले ही बता चुके हैं।

Ek Muslim Fajar ki Qaza Namaz Ka Tarika Dikha raha hai
Fajar ki Qaza Namaz Ka Tarika

तो आइए, फजर की क़ज़ा नमाज़ (Fajar ki Qaza Namaz) के बारे में सीखतें हैं। फज्र क़ज़ा नमाज़ पढ़ने का तरीका वही होता है, जो 2 रकात नमाज़ का तरीका होता है।

1. नियत करें: फजर की क़ज़ा नमाज़ की नियत (Fajar ki Qaza Namaz ki Niyat) अरबी और उर्दू में ऊपर दिए गए इसी ब्लॉग पोस्ट में देखी जा सकती है।

2. तकबीर कहें: "अल्लाहु अकबर" कहते हुए नियत (हाथों को सीने पर बांधकर) के बाद "सना" पढ़ें और नमाज़ शुरू करें।

3. क़राअत करें (तिलावत): फातिहा सूरह और कोई क़ुरान की छोटा सा सूरह या कुछ आयतें पढ़ें।
4. रुकू करें (झुकना): "अल्लाहु अकबर" कहकर रुकू की स्थिति में झुक जाएं। रुकू में होते हुए कम से कम तीन बार यह दुआ पढ़ें। 
  • सुभान रब्बियल अज़ीम (कम से कम तीन बार)
रुकू के बाद खड़े होते हुए समीअल्लाहु लिमन हमीदा कहें और एक बार "रब्बना लकल हम्द" कहें। उसके अल्लाह हु अकबर कहते हुए सजदा करें। 

5. सजदा करें: पहले सजदा की स्थिति में सिर झुका लें और कम से कम तीन बार यह दुआ पढ़ें।
  • सुभान रब्बियल आला (कम से कम तीन बार)
नोट: इस तरह दो सजदों के बाद फजर की क़ज़ा नमाज़ की पहली रकात नमाज़ पूरी हो जाती है। पहली रकात के बाद दूसरी रकअत नमाज़ के लिए सूरह फातिहा से शुरू करें।  

दूसरी रकात में दूसरा सजदा करने के बाद "अल्लाहु अकबर" कहते हुए बैठे "रब्बना लकल हम्द" कहें और फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए सजदा करें। पहले सजदे की तरह इस बार भी सजदे में वही दुआ पढ़ें। 

6. क़ायदा (बैठना): दोनों सजदे करने के बाद अत्तहिय्यात, दुरूद शरीफ और दुआ ए मासुरा पढ़ें। और फिर दाहिनी तरफ और बाईं तरफ सलाम फेरें। इस तरह 2 रकात फजर की क़ज़ा नमाज़ पूरी हो जाती है। 

फजर क़ज़ा नमाज़ की जरुरी शर्तें

  • नमाज़ से पहले वुज़ू कर लें।
  • साफ़ और पाक कपड़े पहनें।
  • शांत और पाक जगह पर नमाज़ पढ़ें।
  • नमाज़ के दौरान ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें।
  • नमाज़ के बाद दुआ करें।

फजर क़ज़ा नमाज़ का समय (Fajar Qaza Namaz ka Time)

फजर क़ज़ा नमाज़ का समय सूरज की पहली किरण निकलने के 20 मिनट के बाद का समय होता है। और सूरज की किरणें जमीन पर फैलने लगती हैं। 
  • फजर की क़ज़ा नमाज़ का समय: Al Ehsaan TV
यदि आप सूरज निकलने से पहले फजर क़ज़ा नमाज़ अदा नहीं कर पाते हैं, तो आप इसे सूरज के निकलने के बाद भी पढ़ सकते हैं। लेकिन, इसे जल्द से जल्द अदा करना ही सबसे अच्छा है।

हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम कभी भी कोई नमाज़ न छोड़ें। अगर कभी ऐसा हो जाए तो जल्द से जल्द क़ज़ा नमाज़ अदा कर लें। फजर की क़ज़ा नमाज़ भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी कि फर्ज़ नमाज़। 

जमात से नमाज पढ़ने के 7 फायदे

इस्लाम में नमाज़ को बहुत अहमियत दिया गया है। यह हर बालिग मुसलमान का फर्ज़ है कि वह रोज़ाना 5 वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ें जमाअत के साथ पढ़ना ज्यादा सवाब मिलता है।

रोज़ाना की पांच नमाज़ों को सही वक़्त पर जमाअत के साथ पढ़ना क्यों ज़रूरी है? इसके कई कारण हैं। 

1. अल्लाह की रज़ामंदी: हदीस में बताया गया है कि जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ने से अकेले नमाज़ पढ़ने की तुलना में 70 गुना ज़्यादा सवाब मिलता है।

2. एकता और भाईचारा: जमाअत में नमाज़ पढ़ने से मुसलमानों में एकता और भाईचारा बढ़ता है।

3. अनुशासन: नमाज़ को सही वक़्त पर पढ़ने से अनुशासन और समय का महत्व समझने में मदद मिलती है।

4. प्रेरणा: दूसरों को नमाज़ पढ़ते देखकर प्रेरणा मिलती है और नमाज़ के प्रति हमारी रगबत बढ़ती है।

5. तालीम: नमाज़ में गलती होने पर दूसरों से अपनी नमाज़ सुधार करने का मौका मिलता है।

6. सामाजिक ज़िम्मेदारी: जमाअत में नमाज़ पढ़ना एक सामाजिक ज़िम्मेदारी है।

7. मस्जिद का महत्व: मस्जिद में नमाज़ पढ़ने से मस्जिद की हिफाज़त होती है। और उसकी रौनक बढ़ती है।

निष्कर्ष

यह ब्लॉग पोस्ट आपको फजर की क़ज़ा नमाज़ की नियत (Fajar ki Qaza Namaz ki Niyat) समझने में मददगार साबित हुआ होगा।

फजर की क़ज़ा नमाज़ (Fajar ki Qaza Namaz) पढ़ना हर बालिग़ मुस्लमान पर फ़र्ज़ है और उसकी ज़िम्मेदारी है।  जो हमें अल्लाह के लिए इबादत करने का मौका देती है।

यह ब्लॉग पोस्ट आपको फज्र क़ज़ा नमाज़ की नियत (Fajr Qaza Namaz ki Niyat), रकतों और इसे पढ़ने के तरीके के बारे में पुरे विस्तार से जानकारी प्रदान कर चुकी है। #नमाज़ कायम करो। 

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

आप के तआवुन के लिए शुक्रिया !

एक टिप्पणी भेजें (0)